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5 - वास्तु का भूखंडो के मार्गो से संबंघ

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 वास्तुशास्त्र को अनेक ग्रन्थों में वास्तु के स्थानों और मार्गों के महत्व के बारे में बताया गया है। इससे यह ज्ञात होता है

 कि किसी भी भूखंड (भूमि) के आसपास स्थित मार्ग किस प्रकार भूखंड में रहने वालों पर शुभाशुभ प्रभाव डालते हैं।

 किसी भूखंड के एक या अधिक दिशाओं में मार्ग हो सकते हैं। ये सभी विभिन्न परिस्थितियों के परिचायक हैं। आगे इन

 मार्गों के प्रभावों की जानकारी इस प्रकार है: 

 एकमार्गी भूखंड- अनेक भूखंडों में प्रायः एक ओर मार्ग होते है। ये मार्ग पूर्व, पश्चिम, उत्तर अथवा दक्षिण दिशा में हो

 सकते हैं। इन मार्गों के कारण भूखंड निवासियों को विभिन्न फलों की प्राप्ति होती है।

 पूर्व मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के पूर्व में मार्ग हो तथा शेष सभी दिशाएं बन्द हो तो ऐसा भूखंड सभी दृष्टि से 

 सफल माना गया है। इसमें निवास करने वालों को कभी किसी वस्तु का अभाव नहीं सताता। आरोग्य तथा स्वास्थ्य 

 भी बना रहता है।

 पश्चिम मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के पश्चिम में मार्ग हो और शेष तीनों दिशाएं बंद हो तो ऐसे भूखंड को

 निवास के साथ ही साथ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी उपयुक्त माना गया है।

 उत्तर मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के उत्तर दिशा में मार्ग हो और शेष सभी दिशाएं बन्द हों तो ऐसा भूखंड

 साधारण प्रभाव वाला होता है। अतः यहां पर जिस उद्देश्य के लिए वास्तु रचना की जाती है, उसमें सामान्य लाभ प्राप्त

 होतें हैं।

 दक्षिण मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के दक्षिण दिशा में मार्ग हो और शेष तीनों दिशाएं बंद हों तो यह निम्न

 स्तर का माना जाता है, क्योंकि वास्तुशास्त्र में दक्षिण को यम मार्ग कहा गया है। परंतु इसके वास्तुदोषों का समुचित 

निवारण करके अधिकांश दुष्परिणामों को दूर किया जा सकता है।

 द्विमार्गी भूखंड- कभी-कभी भूखंड के दोनों तरफ मार्ग होते हैं। ये मार्ग किसी भी दो दिशाओं मे हो सकते हैं। ऐसे

 में भी भूखंड में रहने वाले सभी व्यक्तियों को अनेक शुभाशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

 उत्तर एवं पश्चिम मार्गी भूखंड- ऐसा भूखंड साधारण फलाफल वाला माना गया है जिसके उत्तर एवं पश्चिम दिशाओं 

से मार्ग निकले हों, परंतु दक्षिण और पूर्व दिशाएं बंद हों। ऐसे भूखंड के निवासी एक ओर जहां दुखों तथा कष्टों से दूर

 रहते हैं, वहीं दूसरी ओर अधिक सुखी एवं समृद्ध भी नहीं हो पाते।

 पूर्व और दक्षिण मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के पूर्व और दक्षिण दिशाओं में मार्ग हो तथा उत्तर एवं पश्चिम

 दिशाएं बंद हों तो ऐसी भूमि पर बनी वास्तु रचना अशुभ और हानिकारक सिद्ध होती है। ऐसे मकान में निवास करने

 वाले लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिनमें से प्रमुख है- धन का अभाव, दुख तथा 

परेशानियों का निरंतर बने रहना।

 पूर्व तथा पश्चिम मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के पूर्व तथा पश्चिम दिशाओं में मार्ग हो और उत्तर एवं दक्षिण

 दिशाएं बंद हों तो ऐसे भूखंड को मिले-जुले प्रभाव वाला माना गया है। परंतु यदि इस भूखंड को डॉक्टर का 

क्लीनिक,दवा की दुकान के रूप में प्रयोग किया जाए तो यह काफी कारगर सिद्ध होती है।

 उत्तर एवं दक्षिण मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के उत्तर एवं दक्षिण दिशाओं में मार्ग हो तथा पूर्व और पश्चिम

 दिशाएं बंद हों तो यह सभी प्रकार की कामनाएं फलीभूत करने वाला सिद्ध होता है। ऐसे भूखंड पर निवास करने वाले 

लोग सफलता की नई ऊंचाईयां छूते हैं। अतः सदैव सभी प्रकार की व्यावसायिक तथा आवासीय वास्तु रचना के लिए ऐसे

 ही भूखंड का चयन किया जाना चाहिए।

 उत्तर और पूर्व मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के पूर्व और उत्तर दिशाओं में मार्ग हो तथा पश्चिम एवं दक्षिण दिशाएं बंद

 हों तो वह ऐश्वर्यदायी भूखंड सिद्ध होता है। ऐसा भूखंड विशेष रूप से आवासीय वास्तु रचना पर अपना प्रभाव दिखाता

 है। ऐसी स्थिति में उस भूखंड में रहने वाले लोगों को पूर्व की खुली दिशा से सूर्य की तेजस्वी किरणों द्वारा निरंतर ऊर्जा 

मिलती रहती है। इससे गृहस्वामी तथा परिवार के अन्य सदस्य सुख-समृद्धि, सम्पन्नता और ऐश्वर्य प्राप्त करते हैं। अतएव

 ऐसे भूखंड पर अवश्य ही वास्तु रचना की जानी चाहिए।     

 पश्चिम तथा दक्षिण मार्गी भूखंड- पश्चिम तथा दक्षिण में मार्गों का होना और उत्तर एवं पूर्व दिशाओं का बंद होना अत्यंत 

अशुभ माना गया है। इस प्रकार के भूखंड पर बनी वास्तु रचना किसी भी तरह का शुभ प्रभाव नहीं दिखाती। ऐसे भूखंड 

पर न तो व्यावसायिक और न ही आवासीय वास्तु का निर्माण किया जाना चाहिए। ऐसे भूखंड का त्याग कर देना ही 

श्रेयस्कर होता है।

 त्रिमार्गी भूखंड- कभी-कभी भूखंड के तीन ओर मार्ग स्थित होते हैं। ये भूखंड भी उसमें रहने वाले व्यक्तियों पर अच्छे

 अथवा बुरे प्रभाव डालते हैं। ऐसे भूखंडों का शुभाशुभ प्रभाव भी यहां प्रस्तुत किया जा रहा है।

 उत्तर, पश्चिम एवं दक्षिण मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के उत्तर, पश्चिम और दक्षिण दिशा में मार्ग हो तथा पूर्व

 दिशा किसी कारणवश बाधित हो तो ऐसा भूखंड अशुभ प्रभाव वाला होता है। ऐसी स्थिती में यहां के निवासी प्रायः

 शारीरिक व्याधियों के शिकार होते हैं। अतः वास्तु शास्त्र में इस तरह के सभी भूखंड का त्याग करने को कहा गया है।

 पश्चिम, उत्तर और पूर्व मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड के पश्चिम, उत्तर और पूर्व दिशाओं से मार्ग निकल हों तथा

 दक्षिण दिशा बंद हो तो ऐसा भूखंड गृहस्वामी एवं अन्य परिवारजनों के लिए अत्यंत शुभ सिद्ध होता है। इसका कारण

 यह है कि सूर्य की लौकिक किरणें इस भूखंड में रहने वालों के सभी कष्टों का हरण कर लेती हैं।

 उत्तर, पूर्व तथा दक्षिण मार्गी भूखंड- यदि किसी भूखंड की पश्चिमी दिशा बाधित हो तथा उत्तर, पूर्व एवं दक्षिण 

दिशाओं में मार्ग हो तो यह शुभ फलदायक होता है। ऐसी भूमि मुख्यतः व्यावसायिक गतिविधियों में सफलता प्रदान 

करती है। यदि इस भूखंड पर होटल, सिनेमाघर, चिकित्सालय, विद्यालय आदि में से किसी का निर्माण कराया जाए तो 

उल्लेखनीय सफलता अर्जित की जा सकती है।

 पूर्व, दक्षिण एवं पश्चिम मार्गी भूखंड- यदि भूखंड के पूर्व, दक्षिण एवं पश्चिम दिशाओं में मार्ग हो तो उत्तर दिशा 

बाधित हो तो यह बहुत अशुभ फल देता है। यदि भूखंड की वास्तु संबंधी सभी समस्याओं का समाधान कर भी दिया

 जाए तो भी साधारण से अच्छे फल नहीं दे सकता। अतः ऐसे भूखंड का उपयोग कदापि नहीं करना चाहिए।

सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

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