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वास्तु में पेड़ पौधो का महत्व

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          लक्ष्मी अर्थात सुख-शांति एवं ऐश्वर्य को वृक्षों से संबंधित बताते हुए वास्तुशास्त्र कहता है कि यदि कोई वृक्ष गलत दिशा या 

स्थान पर लगा दिया जाय तो वह भी दुर्भाग्य का कारण बन जाता है। वराह मिहिर ने अपने वास्तुशास्त्र में इसका विस्तृत विवरण 

प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, यदि घर के निकट पलाश, वट,उदुम्बर, पीपल आदि के वृक्ष पश्चिम, उत्तर या पूर्व में हो तो गृहस्वामी

आपदाओं तथा कष्टों से घिरा रहता है। लेकिन यदि उत्तर में पलाश, पूर्व में वट, दक्षिण में उदुम्बर और पश्चिम में पीपल का वृक्ष लगा

 हो तो ये गृहस्वामी को धन-धान्य से परिपूर्ण करते हैं। संपूर्ण भवन निर्माण के बाद कभी भी नैऋत्य एवं आग्नेय कोण में उद्यान या

 बाग-बागीचा नहीं लगाना चाहिए। यदि इस प्रकार का कृत्य किया जाता है तो इसका विनाशकारी परिणाम भुगतना पड़ता है। जो 

व्यक्ति अपने घर के उद्यान में गलत दिशा में पेड़-पौधे लगाता है, वह जान-बूझकर अनिष्ठ को आमंत्रित करता है। इससे वह स्वयं तो 

नष्ट होता ही है, पुत्र-पौत्रों के अनिष्ट तथा धन-हानि का भी कारण बनता है। फलदार, शूल वाले अथवा दूध वाले वृक्ष निवास स्थान के

 समीप नहीं लगाने चाहिए। ऐसे वृक्षों की छाया एक प्रहर भी घर पर पड़ना शुभ नहीं होता अर्थात् केला, चम्पा, चमेली और पाटल 

वृक्ष का घर में होना शुभ नहीं है। इससे घर में लक्ष्मी नष्ट हो जाती है। फलतः अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है। जो व्यक्ति गृह-

परिवार का सुख, शांति और समृद्धि की छाया चाहता है उसे कभी भी अपने घर में पलाश, कचनार, श्लेष्मांतक, अर्जुन एवं करंज आदि

के वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। ये सभी वृक्ष सुख-शांति छीनने वाले होते हैं।  जिस घर के उद्यान में बेर, केला, अनार और एरंड आदि के 

वृक्ष पनपते हैं, उस घर में पुत्र-पौत्रों का विकास नहीं हो पाता। यदि कांटेदार वृक्ष घर के अन्दर हों तो गृहस्वामी को सदैव शत्रुभय

 सताता रहता है। अगर क्षीर वृक्ष या दुग्ध युक्त वृक्ष घर के उद्यान में हों तो वे लक्ष्मी के प्रवेश में रुकावट पैदा करते हैं। जिस वृक्ष में 

कांटे, फल एवं दुग्ध-तीनों का सम्मिश्रण हो, वह जनहानि का कारण बनता है। अतः इन सभी अनिष्टकारी वृक्षों को भवन से दूर 

रखकर इनके दुष्परिणामों से बचना चाहिए।  गृहस्वामी को किसी भी प्रकार के वृक्ष की छाया अपने निवास स्थान

पर नहीं पड़ने देना चाहिए। ये वृक्ष चाहे कितने ही श्रेष्ठ क्यों न हों और भले ही स्वर्ण फल देते हों, वे अनिष्टकारी ही सिद्ध होंगे।  यदि 

व्यक्ति वृक्षों का शुभ लाभ प्राप्त करना चाहता है तो उसे इस तरह वृक्ष लगाना चाहिए। घर की पूर्व दिशा में बरगद या वट वृक्ष लगाने 

पर समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि उदुम्बर का वृक्ष दक्षिण में, पीपल का वृक्ष पश्चिम में एवं पलाश का वृक्ष उत्तर दिशा में 

लगाया जाए तो यह गृहस्वामी को हर दृष्टि से लाभान्वित करते हैं। इसके अतिरिक्त सभी प्रकार के वृक्षों को निवास स्थान के निकट 

लगाना अशुभ माना गया है। यदि कोई व्यक्ति अपनी वंश-वृद्धि करना चाहता है, तो उसे अपने आवास के उत्तर और पश्चिम दिशा में 

उद्यान लगाना चाहिए। इससे पुत्र-पौत्रों की संख्या मंे वृद्धि होती है। अतः व्यक्ति को उद्यान लगवाते समय दिशा विशेष का ध्यान 

अवश्य रखना चाहिए । जो व्यक्ति पीपल के वृक्ष का रोपण अपने उद्यान में करता है, वह श्री विष्णु धाम की स्थापना करता है। परंतु 

यह रोपण पूर्ण विधि-विधान के साथ किया जाना चाहिए। ऐसा करने से गृहस्वामी को वैकुण्ठ में स्थान मिलता है। जो व्यक्ति बरगद

 के वृक्ष का रोपण यमक के रूप में (दो वट वृक्षों को लगाना) करता है, वह निश्चित ही शिव धाम को प्राप्त करता है। वहां उसका 

स्वागत अप्सराओं एवं गन्धर्वों द्वारा होता है। जो व्यक्ति भगवान महादेव को अति प्रिय बिल्ब वृक्ष अपने आंगन में लगाता है, उसके 

घर में लक्ष्मी पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है। जो व्यक्ति अपने घर के आंगन में आंवले के वृक्ष का रोपण करता है, उसे ब्राह्मणों का 

आशीर्वाद निरंतर मिलता रहता है। इस प्रकार गृहस्वामी को अनेक यज्ञों का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है। जो व्यक्ति तुलसी के पौधे 

का रोपण अपने आंगन में करता है, वह हजारों वर्षों तक वैकुण्ठ धाम में स्थान पाता है। उचित स्थान पर लगा वृक्ष धन लक्ष्मी के 

आगमन में सहायक होता है। वह गृहस्वामी को सुख, ऐश्वर्य और धन-धान्य से संपन्न कर देता है। लेकिन गलत दिशा में वृक्ष रोग, 

भय, निर्धनता और दुखों का कारण बनता है। अतएव भवन निर्माता को किसी भी प्रकार के भवन निर्माण में वास्तु के सिद्धांतों का 

पूर्णतः पालन करना चाहिए। इससे गृहस्वामी जीवन पर्यन्त मां लक्ष्मी की छत्रछाया में रह सकता है।

वास्तुशास्त्र के नियमानुसार आठों दिशाओं में अलग-अलग पेड़ पौधें, लता आदि लगाने से वास्तु की उर्जा संतुलित रहती है जिससे 

घर में सुख शांति, लक्ष्मी की प्राप्ती होती है। आठांे दिशाओं में पेड़ पौधें, लता ऐसे लगायें:-उतर दिशा - पलाश, पीले फूल, छोटे पोधे, 

अमरुद, कैंथ, पाकड़ तथा कमल के फूल। पूर्व  दिशा - वट,, कटहल ,आम। पश्चिम दिशा - पीपल ,अशोका , निलगिरी। दक्षिण दिशा 

- उदुम्बर , नीम, नारियल, अशोक ,गुलाब । इर्शान दिशा (उतर-पूर्व )

सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

 

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