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यंत्रो द्वारा वास्तुदोष का निवारण

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यंत्र कई प्रकार के होते हैं जैसे - भू पृष्ठीय , पदम पृष्ठीय , मेरू पृष्ठीय । वास्तुशास्त्र के अनुसार मानव शरीर का प्रत्येक अंग भवन के
 किसी न किसी हिस्से का प्रतिनिघित्व करता है। और इसीलिये भवन के किसी विशेष हिस्से में वास्तुदोष होने पर वह अंग बीमार 
हो जाता है। उदाहरण के लिए - ब्रहा्रस्थल के दुषित होने पर हद्वय रोग एंव ईशान दिशा के दुषित होने पर मस्तिष्क रोग हो सकता 
है।
   विभिन्न दिशाओं व समस्याओं के अनुसार व्यक्ति विशेष के लिए विशेष यंत्र लगाना हितकारी होता है।     उतर दिशा - इस दिशा
में दोष होने पर उतर की दिवार पर श्रीयंत्र लगाना चाहिये।    दक्षिण दिशा - यह दिशा दुषित होने पर लकवा, सिरर्दद, ब्रेनहेमरेज, 
जैसे रोग हो सकते है। मंगल यंत्र की स्थापना दक्षिण दिवार पर करने से दोष समाप्त किये जा सकते हैं।    पूर्व दिशा - यहां दोष होने
पर उच्च रक्तचाप व हद्वय संबंघि रोग हो सकता है। सूर्य यंत्र की स्थापना से लाभ होगा।  पश्चिम दिशा - यह दिशा दुषित होने पर 
मघुमेह, मोतियाबिंद एंव सफेद दाग जैसें रोग हो सकते हैं इस दोष को समाप्त करने के लिये शनि यंत्र की स्थापना करनी चाहिये।
 
  ब्रहा्रस्थान में बुघ यंत्र, वायव्य कोण में गुरू यंत्र , ईशान में चंद्र यंत्र, आग्नेय में राहु यंत्र, नैऋत्य में शुक्रयंत्र की स्थापना करने से 
वहां के दोष कम अथवा समाप्त हो जाते है।     दुर्गा यंत्र - गृहस्वामी सुखी रहता है, इसे मुख्य प्रवेष द्वार पर लगाना चाहिये। इसे 
शुक्रवार अथवा रविवार को सूर्य उदय के समय लगाये।  इंद्राणी यंत्र - यह एक सुरक्षा कवच है। लगातार हानि होती रहे तो इसे
 स्थापना करें। दुकान में हानि से बचा जा सके।     मारूती यंत्र - मारूती यंत्र हनुमान जी का यंत्र है। भूमि संबंधि विवाद में परेशान हो
 तो इस यंत्र का प्रयोग करना चाहिये। जमीनी विवाद जल्द सुलझ जायेगा।      वरूण यंत्र - जल से संबंधित समस्याओं का निपटारा
 करता है। यदि जल स्थान ,नलकूप अथवा पानी की टंकि गलत दिशा में हो तो इस यंत्र को लगाने से जल संबंधि वास्तुदोष दूर हो 
जाता है।     सिद्ध बीसा यंत्र - यह यंत्र मां जगदम्बा का है। दुकान की चौखट पर लगा देने से किसी प्रकार की कोई टोक नहीं लगती।
  किसी का श्राप या बुरी नजर का असर नहीं होता। यह दुकान का रक्षा कवच है।      भौम यंत्र - यदि दुकान में नौकरो द्वारा चोरी की
 जाती है या ग्राहकों द्वारा हेराफेरी की जाती है या उधारी का पैसा नहीं आ रहा तो स्थपित करे।    काली यंत्र - इसे उधोग,कारखानो में
तथा वर्कशापों में स्थापित किया जाता है। यह महाकाली का मुख्य यंत्र है।    कालसर्प यंत्र - कुंडली में स्थित कालसर्प योग का 
दुश्प्रभाव दूर करने में सहायक।    श्री महालक्ष्मी यंत्र - दौलत, सम्पन्नता प्रदायक, लक्ष्मी प्राप्ती के लिये। शुक्रवार को महालक्ष्मी जी
 की पूजा कर के पूजा स्थान में स्थापित करे।    कुबेर यंत्र - जल्द प्रसन्न होने वाले देवता। धर - दुकान में पूर्व दिशा में या तिजोरी में
 
स्थापित करे।    श्री गायत्री यंत्र - धन वृद्धि, विधा वृद्धि,मन की शांती के लिये तथा शुभ इच्छित कामनाओं की प्राप्ति के लिये श्री 
गायत्री यंत्र, मंत्र के साथ जाप करे।    वाहन दुर्घटना नाशक यंत्र -बार बार हो रही दुर्घटना से बचाव के लिये। मंगलवार तथा शनिवार
 को इसे पूजा धर में स्थापित करे।    श्री बगुलामुखी यंत्र - शत्रुओं से बचाता है, मुकदमे में जीत दिलाता है, धर में ग्रह शांति के लिये।
 इस यंत्र को मंत्र से शुद्व कर ले। लड़ाई झगड़ो में कमी आती है।    श्री शनि यंत्र - साठे सती, ग्रह पीड़ा निवारण में, श्री शनि यंत्र के
 
सामने शनि मंत्र का जाप करे।    महामृत्युंजय यंत्र - कष्ट हरण के लिये। सर्वरोग नाशक, इस यंत्र कोे सामने रख कर महामृत्युंजय 
मंत्र का जाप करने से आवश्य फल मिलता है।    त्रिव शक्ति यंत्र - शांति कार्य सिद्वी व ग्रहों की शांति के लियें।    श्री वेभव लक्ष्मी यंत्र,
 श्री सरसवती यंत्र , वास्तु दोष निवारण , श्री सुर्दशन यंत्र ,  श्री संतान गोपाल यंत्र , श्री वशीकरण यंत्र , सिद्व श्री यंत्र , व्यापार वृद्वियंत्र
 , श्री मनोकामना यंत्र  आदि ऐसे बहुत से यंत्र है, अगर इन्हे मंत्रो सें  सिद्व कर ले, जिनसे हम, अगर इन यंत्रो की पूजा करें तो 
मनोवांच्छित फल पा सकते हैं।
सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर
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