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( सवाल - जवाब ) वास्तुशास्त्र -1

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प्र - क्या  किराये के मकान में भी वास्तुशास्त्र के नियम लागू होते है ?

उतर - वास्तुशास्त्र के नियम, जहां आप वास करते है यानि जहां पर आप रहते है चाहे वह मकान किराये  का हो या अपना हो , दोनो पर

लागू होते है वास्तुशास्त्र पंचमहाभूतो से जुड़ा हुआ एक शास्त्र है पंचमहाभूत यानि वायु, जल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश। किराये के मकान

में अगर वास्तुदोष है  तो उसके बुरे परिणाम किरायेदार को भोगने पड़ते है क्योकि जहां हम रहते है वहां से हमे कास्मिक और जैविक

ऐनर्जी मिलती है। अगर यहीं  ऐनर्जी बराबर नहीं मिलेगी तो रहने वाले व्यक्ति शारिरीक , मानसिक ओआर्थिक समस्याओं से परेशान

रहेगें। इसलिए किराये के मकान पर भी वास्तुशास्त्र 100 प्रतिषत लागू होता है।

प्र -  कुछ घर वास्तुशास्त्र के अनुसार न होते हुए भी वहां पर रहनेवाले व्यक्तियो की तरक्की होती है, यह कैसे ?

उतर - जिस घर में वास्तुदोष है, उसकी लंबी देर तक तरक्की होना संम्भव नहीं है। नये घर में जाने के बाद वास्तुशास्त्र के अच्छे या बुरे

परिणा मिलने के लिए कम से कम 21 महिने का समय लगता है। अर्थात 21 महिनों बाद अगर घर में वास्तुदोष है तो उसके बुरे प्रभाव

धीरे धीरे दिखाई  देने लगते है। वास्तुशास्त्र का संबंध मनुष्य की जन्मपत्री से भी निश्चय रूप से होता है। जब तक जन्मपत्री में ग्रह

बलवान है, तबतक वास्तुदोष के बुरे परिणाम कम मात्रा में दिखाई देते है। जैसे ही ग्रह दशा बदलती है तो इस के परिणाम साफ दिखाई

देना शुरू हो जाते है। करोड़पति से लखपति बनने में देर नहीं लगती, केवल एक महिने के अंदर क्या से क्या हो जाता है मालूम ही नहीं

पड़ता। अगर घर में वास्तुदोष है तो कल या परसो उस व्यक्ति को  उसके बुरे परिणाम भुगतने ही पड़ेगे इसमें कोई संदेह नहीं।

प्र -  क्या  धार्मिक विधी , मंत्र , तंत्र , पूजा अथवा सिद्धियों द्धारा वास्तुदोष ठिक किये जा सकते है ?

उतर - धार्मिक विधी , मंत्र , तंत्र , पूजा से घर में शुभ उर्जा निर्मित होती है इसमें कोई संदह नहीं। उससे घर में रहनेवालो को जरूर फायदा

मिलता है। परंतु यह उर्जा ज्यादा देर तक नहीं टिकती क्योंकि वास्तुदोष के कारण र्निमाण होनेवाली अशुभ उर्जा के कारण इस उर्जा

में रूकावट पैदा होती है।  ज्यादा से ज्यादा 21 दिन तक मंत्र, तंत्र की उर्जा टिकती है। वास्तुदोष ठिक करने के लिए मंत्र ,तंत्र, पूजा,

होम, हवन  हमेशा के लिए काम नहीं आते।  वास्तुदोष को दूर करना ही पड़ेगा।

प्र -   निवास और व्यवसाय का एक ही जगह होना शुभ या अशुभ ?

उतर - निवास और व्यवसाय का एक ही जगह होना ठीक नहीं क्योंकि निवास में रहने वालों का संर्पक व्यवसाय के साथ बार बार आने

से व्यवसाय में  रूकावट पैदा होती है। अगर सम्भव हो तो घर और व्यवसाय को अलग अलग रखा जाये। ये दोनो एक ही जगह होने

से वास्तुअनुसार मिलने वाले फायदे दोनों तरफ आधे -आधे बंट जाते है। इससे व्यवसाय में केवल 50 प्रतिषत ही फायदा होता है। 100

प्रतिषत फायदे के लिए चाहे एक ही घर हो ,परंतु  उस में रास्ते अलग -अलग , घर और व्यवसाय के होने चाहिये।

प्र -   हमने अपने घर के कुछ कमरे किराये पर देने है किस दिशा की तरफ दिये जाए ?

उतर - वास्तुशास्त्र में हम आठ दिशाओं का प्रयोग करते है। ईशान दिशा और नैऋत्य दिशा में जो कमरे बने है  वह कभी भी किसी को

किराये पर नहीं देने चाहिए केवल नैऋत्य दिशा में बना कमरा अगर किरायेदार को दे दिया जाए तो वह मकानमालिक पर भारी पड़

सकता है। ईशान दिशा में बना कमरा अपने पास रखना चाहिए क्योंकि यहंा भगवान का द्धार होता है  और घर की सारी कास्मिक

और जैविक ऐनर्जी यहीं से प्राप्त होती है। अगर यह कमरा किरायेदार को दे दिया जाए तो किरायेदार बहुत फलेगा फूलेगा और

 मकानमालिक के घर में ऐनर्जी की कमी आ जायेगी। बाकी दक्षिण दिशा , पूर्व दिशा  ,पश्चिम दिशा में बने कमरे  किराये को दिये जा

सकते।

 सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

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