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( सवाल - जवाब ) वास्तुशास्त्र -3

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  प्र - क्या वास्तुशास्त्र के अनुसार गृहरचना करने से गरीब लोग धनी हो सकते है ?

उतर - वास्तुशास्त्र के अनुसार गृहरचना करने से गरीब लोग निश्चित रूप से धनी हो सकते है। धनवान बनने के लिए बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए और मेहनत करनी चाहिए। वास्तुअनुसार गृहरचना करने से घर में रहने वाले लोगो की सोच बदलेगी ,नए रास्ते खुलेगंे ,अच्छे काम करने के मौके आऐगें ,उस वक्त उन मौको का फायदा लेना अपने हाथ में है। फायदा लेने से भाग्य बदलेगा। वास्तुअनुसार गृहरचना करके भी कुछ कर्म किया ही नहीं जाए तो धनवान कैसे बनोगे। कर्म करना यह मानव के हाथ में है। सही वक्त पर सही मौका मिलना भाग्य की बात है। वास्तुअनुसार गृहरचना करने से नसीब जरूर बदलता है पर कर्म करने से धनवान बनने का मौका आवश्य मिलता है। इसलिए वास्तुशास्त्र के अनुसार गृहरचना करने से भाग्य मे बदलाव जरूर आता है।

प्र -घर की महिंलाओं में हमेशा मनमुटाव क्यों रहता है ?

उतर - अगर वायव्य दिशा में रसोईघर बना हो तो घर की बहुंए एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाती पाई जांएगी औेर घर की शांति भंग हो जाएगी। इसलिए वास्तुअनुसार ही रसोईघर को बनाये। अडरग्राउड पानी की टंकि, टयूबवैल  गलत दिशा में हो जाए तो भी घर में महिलाआंे पर गलत असर पड़ता है उनमें बिना वजह की चिंता ,तनाव और चिड़चिड़ाहट हो सकती है। सीढ़ी अगर घर में गलत दिशा में बनी है और वह एन्टीकलाक वाईस यानि धड़ी का उलटा धूमना दर्शाता है तो सास- बहंू में हमेशा मनमुटाव रहेगा। इसका उपाय घर में वास्तुदोष को ठिक कर के भी किया जा सकता है।

प्र - कुछ बिलडिंग का निर्माण कार्य अनगिनत रूकावटें दूर करने पर भी अधूरा क्यों रह जाता है ?

उतर - पहला कारण है मुहूर्त, दूसरा मकान की श्ुारूआत और तीसरा कारण है दक्षिण में ढलान का होना। इन्हीं तीनो में से कोई एक कारण तो जरूर है जो मकान बनने में देरी या रूकावट पैदा करता है। प्लाट हमेशा 15 मई से 15 अक्टूबर तक खरीदें औेर इन्हीं महीनो में बनाना भी शुरू कर दंे। मकान की शुरूआत यानि सब से पहले दक्षिण - पश्चिम ( नैऋत्य दिशा ) से बनाना शुरू करें। फिर दक्षिण - पश्चिम से दक्षिण की और बनाये। फिर  दक्षिण से दक्षिण - पूर्व ( आग्नेय दिशा ) की ओर बनायें औेर उसके बाद पूर्व फिर उतर की तरफ बनाये। दक्षिण दिशा में ढलान नहीं होनी चाहिए। दक्षिण में कभी  भी बढ़ा खडडा, ज्यादा खिड़कियां, हलकापन यानि दक्षिण दिशा में, उतर और पूर्व  से छोटी दिवार नहीं होनी चाहिये। यह वास्तु में एक बहुत बड़ा वास्तुदोष हैं। गृह प्रवेश सोमवार ,बुधवार, गुरूवार, तथा शुक्रवार अतः इन्ही वारांे में नये तथा शुभ कार्य करने चाहिये। इस के विपरीत रविवार, मंगलवार और शनिवार से बचना चाहियें क्योकि इनके अच्छे परिणाम नहीं होते। अगर फिर भी मकान नहीं बन पा रहा तो इसका उपाय घर में वास्तुदोष को ठिक कर के भी किया जा सकता है।

प्र - हमारे घर में अक्सर सभी लोग बीमार रहते है , बीमारी घर से जाने का नाम ही नहीं लेती , क्या इसका कारण घर में वास्तुदोष  होना है ?

उतर - हमें जीने के लिए दो मुख्य ऐनर्जी की जरूरत होती है। पहली जैविक ऐनर्जी, जो हमें उतर दिशा सें और दुसरी कास्मिक ऐनर्जी पूर्व दिशा से मिलती है। यानि उतर-पूर्व ईशान दिशा से हमें दोनो ऐनर्जी मिलती है। यह भगवान का द्वार है। यहां से हमे ़पाजीटिव ऐनर्जी मिलती है। अगर घर के उतर-पूर्व ( ईशान दिशा ) में टायलैट बना है तो समझो घर में बीमारी आ जाएगी क्योंकि उत्तर-पूर्व ईशान दिशा में स्वयंः प्रभु वास करते है। इस दिशा को हम टायलैट के रूप में इस्तेमाल करेगंे तो हमारा हाल बद से बदतर हो जाएगा। क्ंयूकि टायलैट में गटर होता है और हम जो भी कमायेगंे सब कुछ गटर में चला जायेगा। उतर-पूर्व ( ईशान दिशा ) में टायलैट होने से घर में भक्ति और शक्ति दोनों की कमी हो जाती है। इससे घर में एक जियोपेथी स्ट्रेैस इक्टठा हो जाती है। जिस से धर में बीमारी जाने का नाम ही नहीं लेती। घर के पूर्व दिशा में भी शोचालय बनाने से बचें, क्योंकि इससे शिशुओं के स्वास्थ्य में गिरावट आती है तथा उनकी बौद्धिक क्षमता प्रभावित होती हैं। इसका उपाय घर में वास्तुदोष को ठिक कर के भी किया जा सकता है।

 

सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

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