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8 - घर में लड़ाई -झगड़े का कारण वास्तुदोष तो नहीं ?

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      वास्शास्त्र के अनुसार घर में लड़ाई- झगड़े तीन कारणो से होते है। पहला है मानसिक कारण , दुसरा है शारीरिक

 और तीसरा र्है आिर्थक स्थिति यानि पैसा। तीनो का रिश्ता इंसान से जुढ़ा हुआ है। इंसान जहॉं घर में रहता है वहीं से

 शुरूआत होती है, हो सकता है एक करण घर में वास्तुदोष भी हो।

       वास्तुशास्त्र में हम आठ दिशाओं का प्रयोग करते हैं। अगर कुंआ, अडरग्राउड पानी की टंकि, टयूबवैल गलत दिशा

 में हो जाए तो भी घर में लड़ाई- झगड़े की नोबत आ जाती है। यदि दक्षिण-पूर्व ( अग्नि दिशा ) में पानी की टंकि 

होगी तो पुत्रो पर गलत असर पड़ेगा ओर वह बात-बात में गुस्सा करेगें। दक्षिण में महिलाआंे पर गलत असर पड़ता है 

उनमें बिना वजह की चिंता ,तनाव और चिडचिराहट हो सकती है। दक्षिण-पश्चिम ( नैऋत्य दिशा ) में पुरूषो या घर के 

मालिक की मानसिक शंाति पर प्रभाव पड़ता है। अगर उतर-पश्चिम ( वायव्य दिशा )में अडरग्राउड पानी की टंकि, 

टयूबवैल होगा तो घर में शत्रुता बढ़ती है और घर के लोगो को भय लगेगा ।

       घर में रसोईघर भी ठिक दिशा में न बनी हो तो भी घर में कई परेशानियंा पैदा हो जाती है। रसोईघर अगर

ईशान दिशा में बनी है तो इससें घर में मानसिक तनाव बढ़ जाता है। साथ ही खान-पान का खर्चा कई गुणा बढ़ सकता 

है। नैऋत्य दिशा में रसोईघर बना हो तो गृह कलेष, परेशानियां, दुर्धटना का भय बना रहता है। अगर वायव्य दिशा में

 रसोईघर बना हो तो घर की बहुंए एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाती पाई जांएगी ओर घर की शांति भंग हो 

जाएगी। इसलिए वास्तुअनुसार ही रसोईघर को बनाये।

       वास्तुशास्त्र के अनुसार दर्पणों का इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिये। गलत स्थान पर लगा दर्पण आपके

 जीवन को अस्त व्यस्त कर सकता है। सस्ते तथा टूटे फूटे र्दपण जो आपकी टेढ़ी मेढ़ी तस्वीर दिखाते हो इनके उपयोग

 से बचना चाहिये। घर के मुख्य दरवाजे के सामने र्दपण का होना अशुभ माना जाता है। इसी प्रकार सोने के कमरे में 

र्दपण नहीं लगाना चाहिये। अगर र्दपण लगाना बहुत जरूरी हो तो इस तरह लगंाए कि जब आप बिस्तर पर बैठे हो ता

 आपकी तस्वीर उसमें न दिखे। बिस्तर के सामने तो भूलकर भी र्दपण नहीं लगाना चाहिये। यह आप की नींद हराम 

कर सकता है और आप शारीरिक बीमारी में जकड़ सकते है। र्दपण को उतर, पूर्व, उतर-पूर्व दिशा में लगाना अच्छा रहता

 है। अगर यहीं र्दपण दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम में लगा हो तो घर में कलह, गुस्सा चरमसीमा में बढ़ जाता है यहॉं तककि

 पति-पत्नी में तलाक की नौबत आ सकती है। घर के सदस्यो में जोढ़र्दद की बीमारी लगी रहती है। 

       वास्तुशास्त्र के नियमो के अनुसार वायव्य दिशा का कमरा अविवाहित कन्या को विवाह के लिए उपलब्घ करवाना

 चाहिये इससे उनका विवाह शीध््रा होगा औेर अच्छा जीवन साथी मिलेगा। क्योकि वायव्य कोण वायुदेवता का स्थान 

है। स्थान परिवर्तन का योग जिस व्यक्ति को चाहिये उसे ही वायव्य दिशा के कमरे की आवश्यकता होती है परन्तु इसी

का कमरा दे दिया जाए तो उसकी प्रवति झगड़ालू हो जाएगी ओर अकसर असंतुष्ट रहेगी। अगर कन्या को उतर-पूर्व का

 कमरा दे दिया जाए तो उसका स्वास्थ खराब रहेगा ओर वह संसारिक  बंघनो से बंघने की बजाए विरक्ति उसके मन में

 पैदा हो जायेगी। दक्षिण-पश्चिम का कमरा बच्चो को दे दिया जाए तो वह घर के हर सदस्य  पर अपना रोब जमायेगें

बढ़े बजुर्गो की बात नहीं सुनेगे। इसलिए सोच समझ कर वास्तु के नियमों का पालन करना चाहिये।

       घर में बेकार पढ़ा समान नकारात्मक उर्जा बढ़ाता है। जिससे घर की शांति पर बुरा असर पढ़ता है। रददी पेपर,

पुराना लोहा, पुरानी टूटी लकड़ी से भी घर में तनाव, चिंता, निराशा, चिढ़चिढ़ाहट ओर गुस्सा आता हैं अगर यह समान

उतर दिशा में होगा र्तो आिर्थक नुकसान होता रहेगा। अगर यही समान पूर्व दिशा में होगा तो घर की शांति भंग होगी

 घर के सारे सदस्यो में, आपस में मनमुटाव रहेगा। जितनी जल्दी हो सके खराब समान को बैचें। बेचने का दिन शनिवार

 अती उतम है।

     चाकू कैंची खुले स्थान पर ना रखे और ना ही उपहार में दे और लें। चाकू कैंची जैसी वस्तुएं वक्त पड़ने पर

 हिंसात्मक रूप घारण कर लेती है इससे घर में लड़ाई - झगड़ा भी हो सकता है जोकि हमारे लिये दुर्भाग्य का द्वार 

खोलती है। धातु की होने की वजह से इन्हे घर के पूर्व और दक्षिण- पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिये क्योंकि इन दिशाओं

 में तत्व लकड़ी है। घातु लकड़ी को नष्ट कर देती है। जिसकी वजह से हमारा स्वास्थय खराब रह सकता है और धन की

सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

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