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6 - खराब भाग्य में वास्तु फलदायक

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अक्सर लोग पूछते है कि क्या भाग्य को बदला जा सकता है ? मेरा मानना है कुछ हद तक, पर शास्त्र की आज्ञा का

 पालन करके उसकी गति में परिर्वतन जरूर लाया जा सकता है, शास्त्र यानि सांईस। मान लो सर्दी आ गई है, मैं स्वेटर

 दे सकता हू पर सर्दी खत्म नहीं कर सकता। गर्मी आ गई ,पंखा दे सकता हूं पर गर्मी खत्म नहीं कर सकता। इन सब

 में सांईस का सहारा लिया जा सकता है। सांईस भी किसी शास्त्र का हिस्सा है। कुछ देर के लिए ही सही, गति में 

परिर्वतन आ जाता हैं। मनुष्य की जिंदगी तीन चीजो पर र्निभर करती  है। पहला है भाग्य, दुसरा वास्तु और तीसरा 

चेतना।

भाग्य क्या है ? ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक कुण्डली में महादशा के वक्त कोई एक ग्रह भाग्य या आय स्थान में उच्च राशि

 में बैठा है। तो वह व्यक्ति घर में शानोशोकत से रहेगा। जो उससे मिलने आयेगा उनकी इज्जत करेगा,उनको

 खिलायेगा,पिलायेगा। उस व्यक्ति की चाह होगी हर बडे़ लोग उसे जाने और वह उन सब से मिले। लोग उस व्यक्ति से 

सलाह लेंगे। इसे भाग्य का चमकना कहते हैं।

 दुसरा है वास्तु - जहॉं हम रहते है, रात को सोते है औेर जहॉं हमारा बचपन,जवानी,बुढ़ापा गुजरता है और हमे यहॉं से

 पाजिटीव ऐनर्जी मिलती है। जिससे हमें खुशी, अच्छे संस्कार मिलते हैं।

 तीसरा है चेतना-चेतना मतलब हमारा मन। जेब में पैसा होगा तो खायेंगे और खिलायंगे भी। मतलब खुशीयॉं बाटेगें,मन

 खुश रहेगा। हम इन तीनो को - भाग्य + वास्तु + चेतना को 33 प्रतिशत में बांट देते है।

यानि 33 प्रतिशत भाग्य + 33 प्रतिशत वास्तु + 33 प्रतिशत चेतना।

उदाहरण: आज हमारा भाग्य चमक रहा हैं। घर का वास्तु बिलकुल खराब हैं। ऐसे में हमारा भाग्य 25 प्रतिशत + वास्तु

 5 प्रतिशत + चेतना 20 प्रतिशत यानि 50 प्रतिशत। अच्छी जिंदगी जियेंगे,खुश रहंगे। कुछ सालो बाद उस ग्रह की दशा

 जो चल रही है,खत्म हुई और कुण्डली की महादशा में, कोई नीच ग्रह की दशा शुरू हो गई। तो सब से पहले चेतना

 खत्म होती है। व्यक्ति मान लेता है कि भाग्य मेरा साथ नहीं दे रहा। उस वक्त भाग्य र्सिफ 5 प्रतिशत  और चेतना भी

 5 प्रतिशत ही रह जाती है। और वास्तु पहले से ही 5 प्रतिशत था।

यानि: 5 प्रतिशत भाग्य + 5 प्रतिशत वास्तु + 5 प्रतिशत चेतना = 15 प्रतिशत। 15 प्रतिशत पर जिंदगी नहीं चलती।

  कल तक जब हम अमीर थे। लोग हमारी सलाह लेते थे। वह सब मुहॅं मोड़ जाते है। हाल यह हो जाता है कि हमे उन

 से कई बार सलाह लेनी पड़ जाती है। गुस्सा आना शुरू हो जाता है। सब से पहले इंसान अपने आप को कोसता है कि

 क्या मेरे साथ ही ऐसा होना था। फिर वह भगवान ओैर किस्मत पर रोता है। बहुत यत्न करता है। मंत्र जाप करता है,

रत्न घारण करता है यहां तक कि तंत्र मंत्र का सहारा लेता है। सब यत्न करने के बाद भी भाग्य नहीं बदलता। आखिर में

 चेतना पूरी तरह खत्म हो जाती है। घर में अशांति का माहोल पैदा हो जाता है। बात-बात में लड़ाई होती है,क्योकि हर

 चीज में पैसा चाहिये। घर में एक ही प्रश्न कहॉं से आयेगा पैसा ? आखिर में सारे रास्ते बंद हो जाते हैं मेरा मानना है

 एक ही रास्ता बचता है। वह है वास्तु... सिर्फ वास्तु। एक अच्छा वास्तुकार आपकी चेतना को जागृत कर सकता है।

 यानि आघुनिक सांईस को अजमा कर वास्तु करवाने से आप के रास्ते खुल जायेगे। जो भी अड़चने आ रही है वह दूर

 हो जायेंगी औेर घर में फिर से खुशहाली का माहौेल आ जायेगा। वह कैसे,देखिये-भाग्य को 5 प्रतिशत ही रहने दो। घर

 का वास्तु करवाने से 25 प्रतिशत तक ठिक हो जायेगा और चेतना 20 प्रतिशत आ जायेगी।

भाग्य को 5 प्रतिशत ही रहने दो + वास्तु 25 प्रतिशत  + चेतना 20 प्रतिशत  =  यानि 50 प्रतिशत पहले जैसे हालात,

खुशहाली, समृद्वि, ऐश्वर्य,पैसा।

एक अच्छा वास्तुकार घर में वास्तुदोष को दूर करके 25 प्रतिशत तक कासमिक औेर जैविक एनर्जी को बैलंस कर सकता

 है। जिस से घर में रहने वाले लोगो की सोच बदलेगी। जब सोच बदलेगी तो चेतना जागृत होगी। मानलो कुण्डली में

 5,10 या 15 साल बाद कोई अच्छा ग्रह फिर से आ जाये तो भाग्य फिर से 25 प्रतिशत + वास्तु जो करवाया 25

प्रतिशत + चेतना 20 प्रतिशत  यानि 70 प्रतिशत। बहुत अच्छी जिंदगी। भाग्य के भरोसे मत बैठो, जीवन अनमोल है।

 घर में सब सदस्यों का जीवन एक दूसरे पर र्निभर है। वास्तु करवाने से सब के रास्ते खुलेगे। वास्तु पर भरोसा करो।

  मानव को वास्तुविज्ञान के सिद्धातों की अवहेलना करने के बजाये उन पर अमल कर के अपना जीवन सुखमय बनाना 

चाहिये।

सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

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