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वास्तु समाधान . 4

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    घर में रहने की इच्छा न होना या कहे कि घर से बाहर जाने की इच्छा होना, इसका मुख्य कारण है घर में डम्प ऐनर्जी का इक्ट्ठा 

होना। डम्प ऐनर्जी घर में सालो साल पुरानी चींजो को रखने से होती है। डम्प ऐनर्जी से छुटकारा पाने के लिए सालो साल पुरानी 

अनावश्यक वस्तुओं को समय आने पर इन्हे गिफ्ट कर दें। अगर गिफ्ट करना बहुत मुशकिल लगता है तो सप्ताह में एक दिन घर में 

तेज उंचा मयूजिक बजाना चाहिये या आप मंदिर की धंटी भी बजा सकते हो।

    किसी मकान में एक सीध में तीन दरवाजे होना जानलेवा फेंग शुई भौतिक दोष  है। क्योंकि इन दरवाजो से हो कर ऊर्जा बहुत

 तेजी से गुजरती है और अंत में इस दोष के कारण मकान के आखिरी कमरे में रहने वाले व्यक्ति इससे बुरी तरह प्रभावित होते हैं। एक

 सीध में तीन दरवाजे होने के दोष से छुटकारा पाने का सरल उपाय है बीचवाले दरवाजे को एक ओर खिसका देना।

   अपने घर में हिंसावाले चित्र कभी न लगाए। आपके घर में कहीं भी, विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में,हिंसा से संबंधित

 कोई भी चित्र या पेन्ंिटग नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह कोना रिश्तों से संबंधित होता है। यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में युद्ध अथवा

 जंगली जानवरों का चित्र लगा होगा, तो इससे आपके परिवारजनों के साथ आपसके संबंधों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

   पुस्तकों की अलमारी  खुली न रखे ये अशुभ ऊर्जा या दमधोटू - किलिंग ब्रेथ उत्पन्न करती है। इससे सांस की बीमारी संबंधित

 रोग होने का खतरा बना रहता है। अनेक लोगों को पुस्तकें पढ़ने का बहुत शौक होता है और उन्हें अपने पास पुस्तकें होने का गर्व भी

 होता है पर पुस्तकों की खुली अलमारियॉं चाकुओं के समान होती हैं,जो नकारात्मक ऊर्जा बाहर फेंकती हैं। इसका प्रभाव तुरंत भले 

ही दिखाई न दे, पर समय आने पर यह प्रभाव अपने आप दिखाई देगा।

  उम भाग्य के लिए घर अथवा आफिस में परदे लगाये। परदा दो परतो वाला होना चाहिए। पश्चिम दिशा के कमरे के परदे सफेद रंग, 

उŸार दिशा के कमरे के परदे नीले रंग के, दक्षिण कोने के परदे लाल रंग के त्रिभुजाकार डिजाइनवाले, पूर्व दिशा के कमरे के लिए हरे

 रंग के आयताकार डिजाइनवाले परदे अच्छे होते है।

  किसी भी दरवाजे पर अथवा दरवाजे के ऊपर या दरवाजे के आगे- पीछे कैलेंडर, धड़ी , पेंटिग न लटकाएं। इसे घर के सदस्यों पर बुरा

 असर पड़ता है।

  रसोईघर में भी पीने के पानी की स्थिति अपना अलग महत्व रखती है। रसोईघर में पानी तथा चूल्हे को एक दुसरे से जितना दुर हो

 सके रखना चाहिए। पीने का पानी भी उतर-पूर्व में रखना चाहिए। पानी पीते वक्त मुंह पूर्व की तरफ हो तो अच्छा होता है। खड़े होकर

 पानी पीना घातक हो सकता है और आप आर्थराइटिस का शिकार हो सकते हो। 

  शयनकक्ष में पानी से संबंघित वस्तुएं या तस्वीर न रखे, क्योंकि इससे आपसी संबंघो में दरार की आशंका रहती है और घर से पैसा 

जल्दी-जल्दी निकलता है।

  घर के पूर्व दिशा में शोचालय बनाने से बचें, क्योंकि इससे शिशुओं के स्वास्थ्य में गिरावट आती है तथा उनकी बौद्धिक क्षमता 

प्रभावित होती हैं।

 वास्तशास्त्र के नियमो के अनुसार वायव्य दिशा का कमरा अविवाहित कन्या को विवाह के लिए उपलब्घ करवाना चाहिये इससे 

उनका विवाह शीध्र होगा ओर अच्छा जीवन साथी मिलेगा। क्योकि वायव्य कोण वायुदेवता का स्थान है। स्थान परिवर्तन का योग 

जिस व्यक्ति को चाहिये उसे ही वायव्य दिशा के कमरे की आवश्यकता होती है परन्तु इसी जगह यदि गृहस्वामी रहेगा तो ठिक नहीं 

रहेगा। उसके जीवन में अस्थिरता आ सकती है। अगर कन्या को दक्षिण-पूर्व का कमरा दे दिया जाए तो उसकी प्रवति झगड़ालू हो 

जाएगी ओर अकसर असंतुष्ट रहेगी। अगर कन्या को उतर-पूर्व का कमरा दे दिया जाए तो उसका स्वास्थ खराब रहेगा ओर वह 

संसारिक  बंघनो से बंघने की बजाए विरक्ति उसके मन में पैदा हो जायेगी। दक्षिण-पश्चिम का कमरा बच्चो को दे दिया जाए तो वह 

घर के हर सदस्य  पर अपना रोब जमायेगें ओर माता-पिता, बढ़े बजुर्गो की बात नहीं सुनेगे। इसलिए सोच समझ कर वास्तु के 

नियमों का पालन करना चाहिये।

 सुनील हिंगल: वास्तु विशेषज्ञ एंव ऐनर्जी स्कैनर

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